Mahashivaratri 2024 : जाने पूजा विधि, मंत्र और समय हिंदी में

महाशिवरात्रि (Mahashivaratri 2024) एक हिंदू त्योहार है जो भगवान शिव को समर्पित है, जो हिंदू धर्म के प्रमुख देवताओं में से एक हैं। “महाशिवरात्रि” (Mahashivaratri 2024) नाम का अनुवाद “शिव की महान रात्रि” है। यह त्यौहार भगवान शिव के सम्मान में प्रतिवर्ष मनाया जाता है और दुनिया भर के लाखों हिंदुओं द्वारा भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

यह त्योहार आमतौर पर हिंदू महीने फाल्गुन (ग्रेगोरियन कैलेंडर में फरवरी या मार्च) में ढलते चंद्रमा की 13वीं रात और 14वें दिन पर पड़ता है। यह दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह वह रात मानी जाती है जब भगवान शिव ने तांडव नामक ब्रह्मांडीय नृत्य किया था। भक्तों का मानना है कि उपवास, प्रार्थना और ध्यान के साथ महाशिवरात्रि (Maha Shivaratri 2024) का पालन करने से आत्मा को शुद्ध करने और आध्यात्मिक जागृति लाने में मदद मिल सकती है।

भक्त अक्सर इस दिन शिव मंदिरों में जाते हैं, विशेष पूजा करते हैं और अनुष्ठानों में भाग लेते हैं। कई लोग तपस्या के रूप में और भगवान शिव के प्रति अपना समर्पण दिखाने के लिए एक दिन का उपवास भी रखते हैं। यह त्योहार सांस्कृतिक और पौराणिक महत्व रखता है और आध्यात्मिक चिंतन और उत्सव का अवसर है।

विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में महाशिवरात्रि (Maha Shivaratri 2024) से जुड़े अद्वितीय रीति-रिवाज और परंपराएं हो सकती हैं, लेकिन केंद्रीय विषय भगवान शिव की पूजा और उनका आशीर्वाद पाने के लिए आध्यात्मिक प्रथाओं का पालन करना है।

2024 में महाशिवरात्रि कब है (2024 me Mahashivaratri Kab Hai)?

प्रारंभ: शुक्रवार, 8 मार्च 2024, चतुर्दशी समय रात्रि 09:57 बजे
समाप्ती: शनिवार, 09 मार्च 2024, चतुर्दशी समय शाम 06:17 बजे

व्रत विधि (Mahashivratri Vrat Vidhi)

  1. पूजा का आरंभ:
    • व्रत की शुरुआत संध्या के समय होती है।
    • एक शुद्ध और साफ कपड़े की चादर या आसन पर बैठकर ध्यान करना चाहिए।
  2. गौरी-शंकर पूजा:
    • शिव-पार्वती की पूजा का आरंभ करें।
    • शिवलिंग को गंगाजल से स्नान कराएं और साफ़ करें।
  3. पूजा सामग्री:
    • शिवरात्रि के दिन बेलपत्र, धतूरा, भांग, बिल्वपत्र, दूध, घी, दही, मिश्रित फल, बील पत्ती, अक्षता, धूप, दीप, फूल, नैवेद्य, गंगाजल, रोली, चाँदनी, इत्यादि का उपयोग करें।
  4. महाशिवरात्रि की रात्रि पूजा:
    • रात्रि के चारों पहरों में पूजा करना अधिक शुभ माना जाता है।
    • चार पहरों में शिवलिंग की पूजा करें, हर पहर में अलग-अलग मंत्र और पूजा विधि का अनुसरण करें।
  5. महात्म्य व्रत:
    • व्रत के दिन एक बार या चार बार नामरूप शिव पूजा करें।
    • भगवान शिव के 108 नामों का जप करना भी शुभ होता है।
  6. व्रत की समापन विधि:
    • व्रत को समाप्त करने के लिए, चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के बाद व्रती को सूर्योदय के समय तक प्रतिष्ठा और धन्यवाद के साथ पूजा करनी चाहिए।
  7. व्रत का भोजन:
    • व्रत के दिन केवल एक समय भोजन करना चाहिए, जिसमें शिव रूपी अन्न होना चाहिए।
  8. ध्यान और मनन:
    • पूजा और व्रत के साथ-साथ ध्यान और मनन का समय भी निकालें, जिससे आत्मा की शुद्धि हो।

शिव मंत्र (Shiv Mantra)

करचरणकृतं वाक् कायजं कर्मजं श्रावण वाणंजं वा मानसंवापराधं ।

विहितं विहितं वा सर्व मेतत् क्षमस्व जय जय करुणाब्धे श्री महादेव शम्भो ॥

=====समाप्त=====

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