vrihaspati vrat

बृहस्पति व्रत (Brihaspati Vrat) : एक ऐसा व्रत जिसे करने से सद्बुद्धि, ज्ञान, पुत्र, परिवार एवं मन को शांति प्राप्त होती है।

हिंदू धर्म  की पवित्र पुस्तक अग्नि पुराण स्कन्द पुराण  एवं रेवा खंड  में Brihaspati Vrat एवं कथा का वर्णन किया गया है  इस पवित्र पुराण में बृहस्पति देव को भगवान श्री हरि विष्णु का अवतार माना गया है। स्कन्द पुराण के अनुसार सत्य को नारायण (विष्णु जी)  के रूप में पूजना ही सत्यनारायण भगवान की पूजा है। 

बृहस्पति व्रत का महत्व (BRIHASPATI VRAT MAHATVA)
बिना किसी जात पात के भेदभाव के इस व्रत को  सभी स्त्री पुरुष  के द्वारा किया जा सकता है 
कुंवारी कन्याओं के द्वारा भी इस व्रत को रखा जा सकता है चूंकि  सत्यनारायण भगवान के साक्षात रूप है जो भी  इस व्रत को मन, क्रम, वचन एवं शुद्ध ह्रदय से पूर्ण करता हैं उन्हें सद्बुद्धि, ज्ञान, पुत्र, परिवार एवं मन को शांति प्राप्त होती है। 
ग्रंथ मुहूर्त शास्त्रानुसार गुरुवार  का दिन भगवान बृहस्पति को समर्पित है जो सभी देवताओं के गुरु हैं और सबसे बड़े ग्रह माने जाते हैं.

बृहस्पति व्रत में पूजा सामग्री (BRIHASPATI VRAT KITNE DIN KARNA CHAHIYE)
पीला कपड़ा 1.5 M
चने की दाल  
जनेऊ
मुनक्का
गुड
पीला फूल/माला 
पान 
लौंग
इलायची
घी
धूप
कपूर 
हल्दी 
सिंदूर 
कलश 
आम के पत्ते
सुपारी 
1 श्रीफल (नारियल)
1 विष्णु भगवान की मूर्ति 
केले का पेड़

बृहस्पति व्रत कितने दिन करना चाहिए (BRIHASPATI VRAT KITNE DIN KARNA CHAHIYE)
इस व्रत को १, ७, ९, १६, ४५, १०८ दिन किया जा सकता है.

बृहस्पति व्रत के मंत्र (BRIHASPATI VRAT KE MANTRA)
ॐ नमो नारायणाय नमः
OM NAMO NARAYANA NAMAH

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः
OM NAMO BHAGWATE VASUDEVAY NAMAH

ॐ बृं बृहस्पतये नमः
OM VRIH VRIHSPATEY NAMAH

ॐ ग्रां ग्री  ग्रौ  सः गुरवे नमः
OM GRAN GRI GRAI SANH GURUVE NMAH

ॐ ऐं श्री बृहस्पतये नमः
OM AIN SHREE  VRIHSPATEY NAMAH

ॐ गुं गुरुवे नमः
OM GUN GURUVE NAMAH

किस दिन से शुरू करना चाहिए गुरुवार व्रत (KIS DIN SE SHURU KARNA CHAHIYE BRIHASPATI VRAT)
बृहस्पति देव व्रत किसी भी महीने के शुक्ल पक्ष के पहले गुरुवार से शुरू करना शुभ माना जाता है 
पौष महीने को छोड़कर किसी भी महीने में प्रारंभ किया जा सकता।

 
केले के पेड़ की क्या दिशा होनी चाहिए (KELE KE PED KI KYA DISHA HONI CHAHIYE )
पूजा करने के लिए केले के पेड़ को ईशान कोण या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाएं केले के पेड़ लगाना शुभ फलदाई माना जाता है  केले  का पेड़ घर के सामने ना लगाए इसे  घर के पीछे साफ सुथरी जगह पर ही  लगाएं।


पूजा विधि (POOJA VIDHI)
प्रातः काल उठकर नृत्यकर्म, स्नानादि से निवृत्त होकर, पीले वस्त्र धारण कर बृहस्पति व्रत का अपनी क्षमता अनुसार संकल्प ले। 
अब एक चौकी पर पीला कपड़ा विछाकर भगवान सत्यनारायण की मूर्ति या प्रतिमा स्थापित करें। 
एक कलश में जल भरकर और उसमे हल्दी डालकर आम के पत्तों के साथ पूजा स्थल पर रखे।  भगवान के समक्ष  दीप जलाए।  पीले रंग से संबंधित चंदन, हल्दी, फूल, वस्त्र, अक्षत (इसे हल्दी में डाल कर पीला बना ले) आदि भगवान श्री हरि को समर्पित करें। बृहस्पति देव को चने की दाल और गुड़ का भोग लगाएं और भगवान बृहस्पति मन में सोच कर मंत्र “ॐ बृं बृहस्पतये नमः” जाप करें। 
बृहस्पति व्रत कथा का पाठ करें अंत में भगवान विष्णु की आरती करें,  पूजा स्थल पर एक कलश में रखा हुआ हल्दी जल केले के वृक्ष में डाले, और क्षमा प्राथना करे। 


क्षमा प्रार्थना मंत्र (CHHAMA PRATHNA MANTRA)
आवाहनं न जानामि, न जाना जानामि तवार्चनम्। 
पूजा चैव न जानामि क्षमय्तम् परमेश्वरः ।।


व्रत के नियम (VRAT KE NIYAM)
पुरे दिन बिना नमक फलाहार कर रात्रि मे भोजन (बिना नामक) ग्रहण करे, व्रत के दिन केले का सेवन न करे .
गुरुवार के दिन पीला वस्त्र, पिला अनाज, हल्दी केला आदि का दान करना फल दायी होता है.

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